AadrNaIya pazkao‚
namaskar‚
jaya maaÐ sarsvatI. hmaara pazkaoM sao AnauraoQa hO ik kRpyaa iva&apna dataAaoM kao batayaoM ik ]naka iva&apna sarsvatI p~ maoM doKa qaa‚ ]sasao sarsvatI p~ kao saucaa$ $p sao calaanao maoM sahayata haogaI. sarsvatI p~ kI Aaor sao saBaI pazkaoM kao Qanyavaad.
BaartIya saMskRit kI eDmaNTna maoM gaitivaiQayaaoM ka ek AaOr vyast maah qaa A@TUbar. navara~ pUjaa tqaa dIpavalaI ka maah. A%yant gava- kI baat hO ik isaTI ha^la maoM dIpavalaI ]%sava manaayaa gayaa. eDmaNTna janarla nao BaI dIpavalaI pr AcCI kvaroja dI.
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pazkao‚ hmaoM AapkI p`itiËyaaAaoM kI A%yant AavaSyakta hO‚ ijasasao sarsvatI p~ kao AaOr BaI AcCa banaanao maoM sahayata imalaogaI. kRpyaa faona yaa [-–p~ Wara Apnao ivacaar BaojaoMÊ Aapko ivacaar hmaara ]%saah baZ,anao maoM kafI mad\dgaar saaibat haoMgaoM.Aapko Wara Baojao gayao p~aoM maoM sao ek sabasao AcCa p~ hma sarsvatI p~ maoM Aapko naama ko saaqa CapogaoM.
Qanyavaad.

 

 

हिन्दी का उदगम

हिन्दी का उदगम सीधे संस्कृत से प्राकति तथा अप्रभान्षा के द्वारा हुआ है।हिन्दी पर द्रविडोँ, तुर्की, फार्सी, अरब, पोर्तगाली तथा अन्ग्रेजोँ ने काफी प्रभाव डाला तथा सुधार लाये।यह बहुत व्याख्यात्मक भाषा है।काव्य मैं यह सरल शव्दों के द्वारा भावनाओं को बहुत अच्छी तरह व्यक्त कर सकती है।यह तार्किक प्रभाव के लिये भी एकदम उपयुक्त भाषा है।

 

 भारत के १८ करोर से भी ज्यादा लोग हिन्दी को मात्रभाषा मनते हैं।इसके अलाबा ३० करोर लोग इसे द्वतीय भाषा के रूप मैं प्रयोग करते हैं।भारत के अलाबा अमेरिका मैं १ लाख, ६लाख ८५ लोग हजार मौरिशष मैं, ९लाख लोग अफ्रीका मैं, २.५ लाख लोग यमन मैं, १.५ लाख लोग युगान्डा मैं, ५ हजार लोग सिन्गापुर मैं, ८०लाख लोग नेपाल मैं, २० हजार लोग न्यु जीलैन्ड मैं तथा ३० हजार लोग जर्मनी मैं हिन्दी का प्रयोग करते हैं।

 

हिन्दी करने बाले स्थान:  हिन्दी प्राय; उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, चन्डीगङ, बिहार, मुम्बई, बन्गलौर, हैदराबाद मैं उपयोग होती है। इसके अलावा पाकिस्तान, फिजी, मौरिशष के साथ कई अलग स्थान भी हिन्दी क प्रयोग करते हैं।

 

 हिन्दी के रूप:  हिन्दी; ब्रज, मारबाडी, हरयान्वी, भोजपुरी, अवधी तथा कई अन्य रूपो मैं मिलती है।हिन्दी प्रयोग करने बाले स्थानों को किसी सीमा मैं नहीं बाँन्धा जा सकता। बहुत से लोग तो पन्जाबी तथा मैथली को भी हिन्दी का रूप मानते हैं।१९९७ मैं हुये एक सर्बेक्षण मैं पाया गया कि ६६% भारतीय हिन्दी बोल सकते हैं तथा ७७% लोग हिन्दी को अपनी भाषा के रूप मैं मनते हैं।

 

हिन्दी का इतिहास हिन्दी सबसे पहले सातबीं सदी मैं अप्रभान्षा के रूप मैं आयी।दसबी सदी तक अप्रभान्षा ने अपने आप को स्थापित कर लिया।ब्रज भाषा हिन्दी का एक बहुत प्रचलित रूप था जो कि उन्नीशबीं सदी मैं खडी बोली के रूप मैं आया।

 

 

समय के साथ हिन्दी (प्राकति तथा संस्कृत का प्रारम्भिक रूप्)(लगभग समय)

७५० बी. सी. - संस्कृत का वेदिक संस्कृत के बाद का क्रमबद्ध विकास।

५०० बी. सी. -  बोद्ध तथा जैन की प्राकति अक्षरमाला का विकास (पूर्वी भारत)

४०० बी. सी. - पाननी ने संस्कृत व्याकरण लिखा (पच्छिमी भारत)।वेदिक संस्कृत से पाननी की संस्कृत का उदगम।

३२२ बी. सी. - मौर्यों द्वारा बृह्मी लिपी का विकास।

२५० बी. सी. - आदि संस्कृत का विकास।(आदि संस्कृत ने धीरे धीरे १०० बी. सी. तक प्राकति का स्थान लिया)

३२०  - गुप्त या सिद्ध मात्रिका लिपी का विकास।

 

अप्रभान्षा तथा आदि हिन्दी का विकास

 

४०० - कालीदास ने "विक्रमोर्यशियम" अप्रभान्षा मैं लिखी।

५५० - वलभी के दर्शन मैं अप्रभान्षा का प्रयोग।

७६९ - सिद्ध सारहपद (जिन्है हिन्दी का पहला कवि मानते हैं) ने "दोहाकोश" लिखी।

७७९ - उदयोतन सुरी कि "कुवलयमल" मैं अप्रभान्षा का प्रयोग।

८०० - संस्कृत मैं बहुत सी रचनायैं लिखी गयीं।

९९३ -  देवसेन की "शवकचर" (हिन्दी की पहली पुस्तक)।

११०० - आधुनिक देवनागरी लिपी का प्रथम स्वरूप।

११४५-१२२९ - हेमचन्द्र ने अप्रभान्षा व्याकरण की रचना की।

 

अप्रभान्षा का अस्त तथा आधुनिक हिन्दी का विकास

१२८३ - खुसरो की पहेली तथा मुकरिस मैं "हिन्दवि" शव्द क उपयोग।

१३७० - "हन्सवाली" की आसहात ने प्रेम कथाओं की शुरुआत की।

१३९८-१५१८ - कबीर की रचनाओं ने निर्गुण भक्ती की नीवँ रक्खी।

१४००-१४७९ - अप्रभान्षा के आखरी महान कवि रघु।

१४५० - रामानन्द के साथ "सगुण भक्ती" की शुरुआत।

१५८० - शुरुआती दक्खिनी का कार्य "कालमितुल हाकायत्" बुर्हनुद्दिन जनम द्वारा।

१५८५ - नवलदास ने "भक्तामल" लिखी।

१६०१ - बनारसीदास ने हिन्दी की पहली आत्मकथा "अर्ध कथानक्" लिखी।

१६०४ - गुरु अर्जुन देव ने कई कविओं की रचनाओं का सन्कलन "आदि ग्रन्थ" निकाला।

१५३२ -१६२३ तुलसीदास ने "रामचरित मानस" की राचना की।

१६२३ - जाटमल ने "गोरा बादल की कथा" (खडी बोली की पहली रचना) लिखी।

१६४३ - रामचन्द्र शुक्ला ने "रीति" के द्वारा काव्य की शुरुआत की।

१६४५ - उर्दू की शुरुआत।

 

आधुनिक हिन्दी

१७९६ - देवनागरी रचनाओं की शुरुआती छ्पाई।

१८२६ - "उधान्त मन्डल" हिन्दी का पहला साप्ताहिक।

१८३७ - ओम् जय जगदीश" के रचियता पुल्लोरी क जन्म ।